सोमवार, मार्च 24, 2014

..तो मोदी की धार को अब काशी नरेश थामेंगे!

वाराणसी । नरेंद्र मोदी की तीव्र सियासी धार को कांग्रेस काशी के तटों पर ही थामने की रणनीति में जुटी है। वाराणसी से चुनाव लड़कर नरेंद्र मोदी सनातन हिंदू आस्था के जिस सांस्कृतिक धरातल पर काबिज होना चाहते हैं, कांग्रेस के रणनीतिकार उसे ही हिलाने का प्रयास कर रहे हैं। काशी नरेश के परिवार के वंशज को मोदी के खिलाफ उतार कांग्रेस इस रणनीति को अंजाम देना चाहती है। काशी में भगवान महादेव के प्रतिनिधि माने जाते रहे काशी नरेश खुद तो सियासत से पूरी तरह दूरी बनाए रहे हैं, लेकिन कांग्रेस उनके भाई को चुनाव में उतारने की योजना को अमली जामा पहनाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस काशी नरेश के वंशज को समर्थन देने के लिए समाजवादी पार्टी को भी राजी करने में जुटी है।
हिंदुत्व के प्रतीकों से भावनात्मक दांव खेलने में माहिर रही भाजपा को कांग्रेस काशी में उसी के अस्त्र से गिराना चाहती है। इस कड़ी में उसे काशी नरेश के परिवार में जगी सियासी महत्वाकांक्षा से कुछ आस भी बंधी है। काशी नरेश अनंत नारायण सिंह राजा की मर्यादा के तहत किसी भी सियासी दल से बराबर दूरी बनाए हुए हैं। मगर उनके चाचा धर्महरि नारायण सिंह के पुत्र अहिभूषण सिंह सियासत से दूर रहने के पक्ष में नहीं हैं। वाराणसी सीट से उनकी चुनाव लड़ने की इच्छा रही है। उनकी इसी इच्छा में कांग्रेस के प्रबंधकों को मोदी के सामने मजबूत उम्मीदवार की संभावनाएं दिखीं। वाराणसी के मौजूदा माहौल को भांपते हुए अहिभूषण सिंह भी हिचके थे।
सूत्रों के मुताबिक, नरेंद्र मोदी की जब काशी के अलावा वडोदरा से भी चुनाव लड़ने की खबर आई तो फिर से यह मामला जिंदा हो गया। अहिभूषण सिंह को लग रहा है कि यदि इस बार सफलता नहीं भी मिली तो मोदी अपनी वडोदरा सीट ही रखेंगे और दोबारा चुनाव होने पर शर्तिया यह सीट उनके खाते में आएगी। कांग्रेस मोदी के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार उतारने के क्रम में पहले मोहन प्रकाश के नाम पर विचार कर रही थी, लेकिन उन्होंने दिलचस्पी नहीं दिखाई। तब दिग्विजय सिंह आगे आए लेकिन कांग्रेस अभी दूसरे विकल्पों की तलाश में है। हालांकि, टिकट की प्रत्याशा में कांग्रेस के स्थानीय नेता अभी भी पूरा जोर लगाए हुए हैं और इस फैसले से स्थानीय स्तर पर पार्टी में बगावत की आशंका से भी इन्कार नहीं है।
इस योजना के सूत्रधारों का मानना है कि काशी के राजपरिवार के नाम पर कांग्रेस और सपा एक साथ आने पर मोदी को कड़ी चुनौती पेश की जा सकती है। सपा वाराणसी से कैलाश चौरसिया को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है लेकिन मुलायम खुद मोदी के खिलाफ संयुक्त उम्मीदवार उतारने के पक्ष में हैं, ऐसे में कांग्रेस काशी नरेश के भाई के सहारे मोदी को घेरने की कोशिश कर रही है।
काशी नरेश का मानना मुश्किल
काशी राजमहल के सूत्रों का कहना है कि कुंवर अनंत नारायण सिंह शायद ही अपने भतीजे के साथ सियासी मोर्चे पर खड़े दिखाई पड़ें। कारण है कि कुंवर साहब जैसे ही काशी में निकलते हैं तो लोग दोनों हाथ उठाकर हर-हर महादेव के नारे के साथ उनका अभिवादन करते हैं। काशी की जनता में वह महादेव के प्रतिनिधि ही माने जाते हैं। इनमें सिर्फ हिंदू ही नहीं काशी नरेश की मुसलिम प्रजा भी हर-हर महादेव के नारे से उनका स्वागत करती है। यही कारण है कि भाजपा ही नहीं आरएसएस तक से काशी नरेश दूरी बना कर रख रहे हैं। कांग्रेस के स्थानीय नेताओं से भी उनके रिश्ते कभी मधुर नहीं रहे। ऐसे में वह भतीजे के साथ खड़े होंगे, यह संभावना कम है। सूत्रों का कहना है कि अहिभूषण सिंह के पिता धर्महरि नारायण सिंह से सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने भी कह दिया था कि वह उनके बेटे को वाराणसी से टिकट देंगे, लेकिन कुंवर साहब के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता करनी होगी। मगर तब भी यह हो नहीं सका था।

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