बुधवार, फ़रवरी 19, 2014

जया की राजनीतिक चाल, रिहा होंगे राजीव के हत्यारे?

चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने राजीव गांधी के सभी हत्यारों की रिहाई का फैसला किया है। इनमें एजी पेरारीवलन और नलिनी भी शामिल हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इन हत्यारों की मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया था।
इस बारे में आज तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने विधानसभा को बताया कि सरकार ने मामले के सभी सात लोगों की रिहाई का फैसला लिया है। हालांकि इसपर अंतिम फैसला राज्यपाल को लेना है।
राजनीतिक पार्टियों में राजनीतिक लाभ लेने की लगी होड़ :
तमिलनाडु में राजनीतिक दलों के बीच राजनीतिक लाभ उठाने के लिए राजीव गांधी के हत्यारों की तरफदारी को लेकर होड़ मच गई है। सभी पार्टियां इससे अधिक से अधिक फायदा उठाने को लेकर कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही। पार्टियां इसका लोकसभा में अधिक से अधिक फायदा उठाना चाहती है।
मंगलवार को राजीव गांधी के हत्यारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही द्रमुक के करुणानिधि ने कहा था कि वे इस फैसले का स्वागत करते हैं, अगर अब इनकी रिहाई हो जाए तो उन्हें और खुशी होगी।
इसके एक दिन बाद ही प्रदेश सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए इन हत्यारों की रिहाई का फैसला ले लिया। बुधवार को इस फैसले की जानकारी मुख्यमंत्री जयललिता ने विधानसभा को दी। प्रदेश में पहले से ही राजनीतिक लाभ की स्थिति में जयललिता की अन्नाद्रमुक को इस फैसले से चुनाव में और लाभ मिले की संभावना है।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों की दया याचिका निपटाने में देरी के पीछे तमिल सियासत की अहम भूमिका रही है। जानकार फांसी में हुई देरी को सिर्फ सरकार की लापरवाही नहीं, बल्कि तमिल सियासत का सबब मान रहे हैं। इसका सुबूत द्रमुक सुप्रीमो करुणानिधि और तमिलनाडु के तमाम नेताओं के बयानों से भी मिल गया। उन्होंने फैसले का स्वागत करते हुए तुरंत ही तीनों की रिहाई की मांग भी बुलंद कर दी।
इस बीच, केंद्रीय मंत्री फारुक अब्दुल्ला ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरुको फांसी पर लटकाने की घटना के लिए केंद्र सरकार पर प्रहार कर जम्मू-कश्मीर में चुनाव से पहले अपना सियासी स्कोर बनाने की कोशिश की। लोकसभा चुनाव से पहले आए इस फैसले से तमिलनाडु की राजनीति सरगर्म हो गई है। माना जा रहा है कि इस भावनात्मक मुद्दे पर सबसे ज्यादा फायदा द्रमुक को मिलेगा। यूपीए-एक सरकार में पूरे समय और यूपीए-दो सरकार में तीन साल तक कांग्रेस के साझीदार रहे एम. करुणानिधि को तमिलनाडु की सियासत में इस मुद्दे पर फिर खड़े होने का मौका मिल जाएगा। इसके साथ ही कांग्रेस को भी तमिलनाडु में कुछ फायदा हो सकता है। हालांकि, कांग्रेस ने इस मामले को अदालत का फैसला बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस संबंध में पूछे गए सवाल को ही नहीं लिया। अलबत्ता, द्रमुक सुप्रीमो एम करुणानिधि ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। एमडीएमके के नेता वाइको ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को 'ऐतिहासिक निर्णय' बताते हुए मुख्यमंत्री जयललिता से अपील की कि वह वेल्लोर जेल में बंद पेरारिवलन, सान्तन और मुरुगन की रिहाई के लिए कदम उठाएं।
अब्दुल्ला ने उठाया अफजल का मुद्दा
उधर, फांसी पर सियासत करने से केंद्रीय मंत्री भी बाज नहीं आए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करने के साथ केंद्रीय मंत्री फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि अफजल गुरु को फांसी पर लटकाना पूरी तरह अन्यायपूर्ण था। हमको इस फैसले की कभी जानकारी तक नहीं दी गई और सीधे उसे फांसी दे दी गई। उन्होंने फांसी की प्रथा पर ही रोक लगाने की मांग की।
राजीव गांधी हत्याकांड: कब क्या हुआ
राजीव गांधी हत्याकांड में फांसी की सजा पाए तीन दोषियों मुरुगन, संथम और पेरीवलन की सजा को उम्रकैद में तबदील कर दिया गया। कोर्ट ने माना की इस मामले में दोषियों की दया याचिका के निस्तारण में जरूरत से ज्यादा समय लगा है, जिसकी वजह से उन्हें मानसिक वेदना से जूझना पड़ा है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र की दलीलों को दरकिनार करते हुए दोषियों की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। इस बहुचर्चित मामले में कई मोड़ आए। आइए जानते हैं इस मामले में कब, क्या हुआ।
21 मई 1991: तमिलनाडू के श्री पैरंबदूर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मानव बम से हत्या कर दी गई।
मई 22 1991: पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया। इस मामले की जांच सीबीआई के अधिकारी डीआर कार्थिकेयन को सौंपी गई। साथ ही घटना स्थल से वहां लगे कैमरे समेत अन्य सबूत भी जुटाए गए।
24 मई 1991 : सीबीआई ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। इस मामले की सुनवाई के लिए एमएम सिद्दीकी को जज नियुक्त किया गया।
11 जून 1991: मामले में पहली गिरफ्तारी भाग्यनाथन और पद्मा के रूप में हुई।
14 जून 1991: इस मामले में पहले आरोपी के तौर पर नलीनी मुरुगन और उसके पति मुरुगन को गिरफ्तार किया गया।
29 अगस्त 1991:- इस मामले में अंतिम आरोपी रंगन की गिरफ्तारी हुई।
20 मई 1992: एसआईटी ने कोर्ट के समक्ष आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की।
24 नवंबर 1993: आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए।
19 जनवरी 1994 :- मामले की सुनवाई कैमरा ट्रायल के रूप में शुरू हई।
29 मई 1994: कोर्ट द्वारा लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण, लिट्टे के इंटेलिजेंस प्रमुख पुट्टू अम्मान और इसकी महिला विंग अकीला को भगोडा अपराधी घोषित किया गया।
3 जून 1994: भारत ने श्रीलंका को लिट़टे प्रमुख विरप्पन और प्रधानमंत्री की हत्या में शामिल अन्य आरोपियों को प्रत्यर्पित करने की मांग की।
30 दिसंबर 1996:- राजीव गांधी हत्याकांड की सुनवाई कर रहे जज सिद्दीकी की जगह वी नवीनथम को जज नियुक्त किया गया। सिद़दीक को मद्रास हाईकोर्ट में जज नियुक्त कर दिया गया।
21 जून 1997: गवाहों के आधार पर आरोपियों से जिरह शुरू हुई।
5 नवंबर 1997: लगभग सात वषरें तक चले मैराथन ट्रायल के बाद इस मामले में कोर्ट ने 28 जनवरी के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया।
28 जनवरी 1997: कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या मामले में सभी 26 आरोपियों को दोषी करार देते हुए लिट्टे प्रमुख विरप्पन को राजीव गांधी की हत्या का दोषी ठहराया।
11 सितंबर 2007: श्रीलंका की रक्षा वेबसाईट ने लिट्टे के आतंकवादी कुमारन पद्माथन [केपी] के थाईलैंड में पकड़े जाने की खबर प्रकाशित की। सीबीआई ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की।
12 सितंबर 2007: थाईलैंड पुलिस ने केपी कुमारन पद्मनाथन की गिरफ्तारी की बात से इन्कार किया।
11 मई 1999: सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की खंडपीठ ने राजीव गांधी की हत्या का दोषी ठहराते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। इसमें नलीनी, संथम, मुरुगन, पेरीवलन कर फांसी की सजा को बरकरार रखते हुए मामले के अन्य दोषी रोबर्ट पायस, जयकुमार, रविचंद्रन की सजा को उम्रकैद में तबदील कर दिया। निचली अदालत ने इन सभी को भी फांसी की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के अन्य 19 आरोपियों को आरोपमुक्त करते हुए बरी कर दिया।
वर्ष 2000 :- इस मामले में फांसी की सजा पाए दोषियों ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की।
28 जून 2006: लिट्टे ने पहली बार भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या करवाने की बात कबूल की।
अगस्त 2011: तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए ग्यारह वर्ष बाद सभी दोषियों की दया याचिका को खारिज कर दिया। दया याचिका को दायर करने वाले मुरुगन, संथम, पेरीवलन थे।
30 अगस्त 2011: मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में फांसी की सजा पाए मुरुगन उर्फ श्रीहरन, संथम और पेरीवलन उर्फ अरिवू की फांसी पर रोक लगाते हुए अलग आठ सप्ताह के लिए स्थगन आदेश जारी कर दिया।
18 फरवरी 2014: सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी की हत्या के लिए दोषी ठहराए गए और फांसी की सजा पाए मुरुगन, संथम और पेरीवलन की फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया। कोर्ट ने इसकी वजह दया याचिका के निस्तारण में हुई देरी को बताया।

कोई टिप्पणी नहीं: